महर्षि दयानन्द आर्य गुरुकुल आश्रम की स्थापना भारतीय दर्शन एवं चिंतन को मूर्त रूप प्रदान करने तथा देश के वंचित समाज को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2010 में की गई। संस्था के गठन के समय निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए गए—
7 अगस्त 2013 को श्रीमती रमा चौधरी द्वारा गुरुकुल को 1 एकड़ भूमि दान में प्रदान की गई। बाद में 0.20 एकड़ भूमि और खरीदी गई। वर्तमान में गुरुकुल के पास लगभग 1.20 एकड़ भूमि है।
कोरोना महामारी के कठिन समय में गुरुकुल के विद्यार्थियों ने 32,000 मास्क तैयार कर समाज में निःशुल्क वितरित किए। यह सेवा कार्य सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा का प्रतीक है।
पर्यावरण संरक्षण हेतु गुरुकुल परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में नियमित रूप से वृक्षारोपण किया जाता है। इससे विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
गुरुकुल में प्रतिवर्ष वार्षिकोत्सव का आयोजन उत्साह और गरिमा के साथ किया जाता है। इस अवसर पर विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए सांस्कृतिक एवं शैक्षिक उपलब्धियाँ प्रस्तुत करते हैं।
भारतीय परंपरा के अनुरूप गोवर्धन पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस आयोजन के माध्यम से गौसेवा और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश दिया जाता है।
गुरुकुल में समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास होता है।
स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पूर्ण सम्मान और देशभक्ति के साथ मनाए जाते हैं। इन आयोजनों से विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा की भावना सुदृढ़ होती है।
महर्षि दयानन्द आर्य गुरुकुल आश्रम पूर्वोत्तर भारत के वनवासी एवं निर्धन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन और संस्कार प्रदान कर रहा है। आपका छोटा सा सहयोग भी किसी बच्चे के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।